पति-पत्‍नी में नहीं रहेगी दूरी, इन उपायों से दूर करें गृह कलेश

वर्तमान में लोगों के पास एक-दूसरे के लिए टाइम नहीं है। पति-पत्‍नी या तो काम में व्‍यस्‍त रहते हैं या मोबाइल में। यही वजह है कि उनके बीच लड़ाई-झगड़े और गृह कलेश की स्थिति पैदा हो जाती है। घर एक धर्मशाला या शरणार्थी शिविर जैसा बन गए हैं। जहां लोग बस सोने, खाने, पीने और रहने के लिए साथ में जीवन बसर करते हैं।

इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे आपस में प्रेम न होना, वैचारिक मतभेद होना, पितृ दोष होना, शराब व सिगरेट आदि व्‍यसनों का सेवन करना, ग्रह दोष, घर की महिलाओं का अनादर करना, संस्‍कारों का अभाव, धन का नाश होना या खुद को घर का मुखिया समझकर अन्‍य सदस्‍यों पर मनमानी करना। आपको बता दें कि घर में क्रोध, कलह और रोना-धोना आर्थिक समृद्धि व ऐश्‍वर्य का नाश कर देता है। व्‍यक्ति में हत्‍या या आत्‍महत्‍या की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

गृह कलेश को रोकने के उपाय

–    प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे घर की सभी नकारात्‍मक शक्तियां बाहर हो जाएगी। घर में सुख-शांति आएगी।

–    घर का वास्‍तु सुधारें और ईशान कोण को मजबूत एवं वास्‍तु अनुसार बनाएं। दक्षिणमुखी मकान में कदापी नहीं रहना चाहिए। इसके साथ ही एकादशी के व्रत रखना चाहिए।

–    गुरुवार को कपूर और गुड घी के साथ सुबह शाम घर में धूप दिखाएं। सुगंधित वातावरण रखने से मन में शांति उत्‍पन्‍न होती है।

–    आपस में प्रेम और प्‍यार बनाए रखने के लिए एक-दूसरे की भावनाओं को समझे और परिवार के लोगों को सुनने और समझने की क्षमता बढ़ाएं। सभी के विचारों का सम्‍मान करें। अपने क्रोध और शराब को छोड़कर परिवार में परस्‍पर प्रेम की स्‍थापना करें।

–    श्राद्ध पक्ष के दिनों में तपर्ण आदि कर्म करना और पूर्वजों के प्रति मन में श्रद्धा रखनी चाहिए। कौआ, कुत्‍ते और गाय को रोटी खिलाते रहना चाहिए।

– पीपल या बरगद के वृक्ष में जल चढ़ाते रहना चाहिए। केसर का तिलक लगाते रहना चाहिए। विष्‍णु भगवान के मंत्र जाप और श्रीमद्भगवत गीता का पाठ करने से पितृदोष समाप्‍त हो जाता है।