अपने नन्‍हें मुन्‍नों को न खिलाएं ये चीजें, गंभीर बीमारियों के हो सकते है शिकार

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अक्सर बच्चों का ख्याल रखना बहुत मुश्किल होता है। खासकर जब आपका बच्चा सिर्फ एक साल का हो। करीब 3 साल तक छोटे बच्चों को बहुत नाजुक तरीके से रखने के जरूरत होती है। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी होता है कि बच्चे को क्या खाना खिलाया जाए जो उसके शरीर और दिमाग का तेज़ी से विकास करने में मदद करेगा। और वह स्वस्थ भी रह सके। कई माता-पिता के लिए यह एक चुनौती हो सकता है क्योंकि कुछ बच्चे खाना खाने में बहुत नखरे करते हैं। और कई बार माता-पिता को यह समझ नहीं आता हैं कि उनको बच्चों को क्या खिलाना चाहिए।

जब आप बच्चे को ठोस आहार देना प्रारंभ करते हैं। तो यह जानना बहुत जरुरी है की कौन से आहार आप को अपने बच्चे को देना चाहिए और कौन सा नहीं। कई बार माता-पिता अपने बच्चे की सेहत को लेकर कुछ गलतियां कर बैठते हैं।

गाय का दूध (Cow milk)

गाय का दूध सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन नवजात शिशुओं के लिए यह बहुत हानिकारक होता है। गाय के दूध में ऐसे प्रोटीन और मिनरल्स होते हैं जो आपका बच्चा उस उम्र में नहीं पचा सकता है। अगर आप बच्चे को ये अभी देंगे तो ये आपके बच्चे के अविकसित गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, कुछ बच्चों में दूध और अन्य डेयरी उत्पादों में मौजूद लैक्टोज के कारण भी पाचन समस्या होती है। एक रिसर्च में यह भी सामने आया है कि गाय के दूध से कुछ बच्चों के आंतों से खून भी आता है जिससे एनीमिया का जोखिम पैदा होता हैं ।

चीनी (Sugar)

अगर आप अभी हाल ही में पेरेंट्स बने हैं तो इस बात का ख़ास ख्याल रखें कि बच्चे को एक साल तक रिफाइंड शुगर ना दें। इससे बच्चे के शरीर में कमजोरी आने लगती है। अगर आप बच्चे को बचपन से ही शुगर या फिर मीठा खाने की आदत लगाते हैं तो इससे उसके शरीर में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे आपके बच्चे का मोटापा भी बढ़ सकता है। बच्चे के दांतों में परेशानी हो सकती है और आपका बच्चा एक्टिव रहने में भी पीछे रहता है।

नमक (Salt)

कई हेल्थ सेंटर के मुताबिक, बच्चे को करीब शुरूआती 6 महीने तक नमक नहीं देना चाहिए। एक दिन में 1 ग्राम से कम नमक ही बच्चे को चाहिए। स्तन के दूध और formula milk में इतना नमक होता है की बच्चे के नमक की आवश्यकता को पूरा कर सके। शुरुआती साल में अपने बच्चे को नमक का सेवन ज्यादा कराने से बच्चे में शारीरिक समस्या पैदा हो सकती है। जैसे की पथरी, हाई ब्लड शुगर, हड्डियों में कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। और बच्चे के गुर्दे भी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाते।

शहद (Honey)

भारत के कई ऐसे राज्य हैं जहां शिशुओं को जन्म के कुछ ही दिनों के अंदर शहद चटाया जाना एक रिवाज है। मगर सच तो यह है की बच्चों को 6 महीने से पूर्व कुछ भी नहीं दिया जाना चाहिए। शहद तो बिलकुल भी नहीं। बच्चों के लिए शहद बोटुलिस्म (infant botulism) का कारण भी बन सकता है। जिससे इनकी जान का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके साथ ही शहद में बैक्टीरिया भी होते हैं जिससे बच्चों की पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है।