Chaitra Navratri 25 मार्च से है शुरू, जानिए इस दिन से क्यों मनाया जाता है हिन्दुओं का नया साल

नवरात्र वह समय है, जब दो ऋतुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के रूप में हम तक पहुँचती हैं। चैत्र नवरात्रि हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र 25 मार्च, बुधवार से 2 अप्रैल, गुरुवार तक है। नवरात्रि में माँ भगवती के सभी नौ रूपों की उपासना की जाती है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए लोग विशिष्ट अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में देवी के 9 रूपों की साधना की जाती है।

चैत्र नवरात्रि से ही क्यों शुरू होता है हिन्दुओं का नया साल

पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के आरंभ का समय चैत्र नवरात्र का पहला दिन माना गया है। कहा जाता है इस दिन देवी ने ब्रह्मा जी को सृष्टि की रचना करने का कार्यभार सौंपा था और इसी दिन से काल गणना भी शुरू हुई थी। देवी भागवत पुराण के अनुसार इसी दिन देवी मां ने सभी देवताओं के कार्यों का बंटवारा किया था। इसलिए चैत्र नवरात्र को हिंदू नववर्ष का आरंभ भी माना जाता है।

देवी पुराण के अनुसार सृष्टि के आरंभ से पूर्व अंधकार का साम्राज्य था। तब आदि शक्ति जगदंबा ने अपने कूष्मांडा अवतार में विभिन्न वनस्पतियों और दूसरी वस्तुओं को संरक्षित करते हुए सूर्य मंडल के मध्य में व्याप्त थीं। जगत निर्माण के समय देवी माँ ने ही ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव की रचना की थी। इसके बाद सत, रज और तम नामक गुणों से तीन देवियां लक्ष्मी ,सरस्वती और काली माता की उत्पत्ति हुई थी।

आदिशक्ति की कृपा से ही ब्रह्मा जी ने संसार की रचना की थी। माँ ने ही भगवन विष्णु को पालनहार शिवजी को संहारकर्ता बनाया और सृष्टि का निर्माण का कार्य संपन्न हुआ। इसलिए सृष्टि के आरम्भ की तिथि से 9 दिनों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरुप की पूजा की जाती है। इस दिन से ही पंचांग की गणना भी की जाती है।