किसी भी काम को शुरू करने से पहले खुद से पूछें ये 3 सवाल

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चाणक्‍य नीति में बताई गई बातों को अगर हम अपने जीवनशैली में शामिल कर लें तो शायद ही आपको कभी किसी मुश्किलों का सामना करना पड़े। चाणक्‍य को भारत का सबसे श्रेष्‍ठ विद्वाना माना जाता है। राजनीति और अर्थशास्‍त्र में चाणक्‍य के बताए नियमों का पालन संभवत: हर विद्वान करता है। चाणक्‍य नीति का पालन करने वाला हर व्‍यक्ति अपने जीवन में कभी असफल नहीं हो सकता, बशर्ते वह इनका पालन ईमानदारी से करे।

आज भले ही हम आधुनिक हो गए हों लेकिन चाणक्‍य नीति की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही बनी हुई है। लाखों लोग आज भी चाणक्‍य नीति

को पढ़कर अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज हम आपको यहां चाणक्‍य नीति का एक बहुत महत्‍वपूर्ण विचार बताने जा रहे हैं, जो आपको कोई भी काम शुरू करने से पहले ये तीन सवाल पूछने की सलाह देता है।

चाणक्‍य नीति में कहा गया है कि मानव प्राणी को कोई भी कार्य प्रारंभ करने से पहले अपने आप से ये तीन प्रश्‍न जरूर करने चाहिए। पहला, मैं ऐसा क्‍यों कर रहा हूं। दूसरा, ऐसा करने पर क्‍या परिणाम होगा। और तीसरा, क्‍या मैं इसमें सफल हो पाऊंगा।

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खुद से जरूर पूछें ये तीन सवाल  

गुरू चाणक्‍य की इस नीति का मतलब है कि मानव मात्र को कोई भी कार्य प्रारंभ करने से पूर्व हमेशा अपने आप से तीन प्रश्‍न जरूर पूछने चाहिए। ये वो तीन प्रश्‍न हैं, जिनके आधार पर आपको यह निर्णय लेना चाहिए कि आप जो काम करने जा रहे हैं, वो आपको करना चाहिए या नहीं। ये सवाल हैं- मैं ऐसा क्‍यों कर रहा हूं, मुझे इसका क्‍या परिणाम मिलेगा और क्‍या ऐसा करने पर मुझे सफलता मिलेगी।

वास्‍तविक जीवन में सामान्‍य तौर पर ऐसा होता है कि कई बार मानव प्राणी कोई भी काम प्रारंभ करने से पहले उस पर ज्‍यादा सोच-विचार नहीं करता। कई बार वह दूसरों की नकल करने की कोशिश में हड़बड़ी में काम शुरू कर देता है, जिसके परिणाम से वह खुद अनजान होता है। ऐसा कर वह न अपना कीमती समय नष्‍ट करता है बल्कि अपने संसाधन और ऊर्जा को भी गलत जगह इस्‍तेमाल करता है, जिसका उसे कोई रिटर्न नहीं मिलता। उस समय तो लगता है कि वो इस काम को करने के लिए सर्वश्रेष्‍ठ है, लेकिन बाद में परिणाम मनमुताबिक न मिलने पर वह परेशान हो जाता है।

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कोई भी नया कार्य प्रारंभ करने से पहले जरूर करें ये काम

आचार्य चाणक्‍य की सीख है कि यदि आप किसी नए कार्य की शुरुआत करने जा रहे हैं तब आपको हर प्रकार से उसके लाभ-हानि पर विचार कर लेना चाहिए। इसका अर्थ है कि आपको पूरी तरह से ठोक-बजाकर यह पता कर लेना चाहिए कि आप किस उद्देश्‍य के लिए काम शुरू कर रहे है। ये सवाल पूछने पर आपको उत्‍तर मिलेगा कि जो कार्य आप करने जा रहे हैं उसमें आपको लाभ होगा या हानि।

पहले सवाल का जवाब मिल जाने पर अब आप अपने आप से दूसरा सवाल पूछिए कि जो कार्य आप करने जा रहे हैं, उसका क्‍या परिणाम होगा। जब आप कोई नया काम करते हैं तो उसके दो रास्‍ते होते हैं, एक सकारात्‍मक और दूसरा नकारात्‍मक। यदि आप इस दूसरे प्रश्‍न का जवाब पूरी ईमानदारी से खोजते हैं तो निश्‍चित ही आपको सही उत्‍तर मिलेगा और आप जीवन में हमेशा सफलता की ओर अग्रसर होंगे।