सूर्य कसेगा कोरोना पर लगाम, इसके पीछे है राहु का हाथ

कोरोना वायरस का खतरा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। पं.शशिशेखर त्रिपाठी का कहना है कि सभी प्रकार के वायरस या बैक्‍टीरिया का प्रतिनिधित्‍व राहु करता है और राहु का संबंध विष से होता है। राहु सर्पकाफन है जिस फन से वह डसता है। संक्रमण का संबंध की राहु से है। यह नकारात्‍मकता को ग्‍लोबलाइज कर सकता है। आपको बता दें कि वर्तमान समय अंतरिक्ष में राहु मिथुन राशि से गुजर रहा है। इस राशि के जिस नक्षत्र से राहु गुजर रहा है वह नक्षत्र आर्द्रा है और आर्द्रा नक्षत्र का स्‍वामी स्‍वयं राहु है। इसे गहराई से समझें तो जिस ड्रॉपलेट्स में कोरोना वायरस यात्रा कर रहा है वही ड्रॉपलेट्स को राहु और आर्द्रा नक्षत्र इंगित कर रहा है। राहु आर्द्रा नक्षत्र में 20 मई 2020 तक रहेगा। इसके बाद से वायरस का प्रसार कम होगा।

मिथुन राशि वायु तत्‍व की राशि है। मिभुन राशि का यदि सिंबल देखा जाए तो स्‍पष्‍ट रूप से समझ में आता है कि इसमें कम्‍युनिकेशन है। दो लोग बात कर रहे हैं। यानी जो सामाजिक चेन है उसके माध्‍यम से राहु ने जहर घोलने का प्रयास किया है। राहु मिथुन राशि में उच्‍च होता है। राहु मिथुन राशि में 23 सितंबर 2020तक रहेगा। राहु के मिथुन राशि छोड़ने के बाद इस वायरस का आतं‍क समाप्‍त होने की प्रबल संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

आरोग्‍य के देवता ने जैसे ही धनु में प्रवेश कियातो वह कमजोर हो गए उसका पूरा फायदा उच्‍च के राहु ने उठाते हुए विषाणु संक्रमण को तेजी से फैलाना शुरू कर दिया। मकर संक्रांति में आते ही राहु विस्‍फोट हो गया और सूर्य के बलवान न होने के कारण कई देशों की सरकारें उसे ठीक से काबू न कर पाई। सूर्य अब मीन राशि में संचरण कर रहे हैं। जनवरी से मार्च तक सूर्य कमजोर रहते हैं और उसी समय राहु रूपी असुर बदलते मौसम का फायदा उठाते हैं।

सूर्य जब मीन से निकलकर अपनी उच्‍च राशि मेष में जाएंगे तब वह मजबूत होंगे तभी सरकारें भी मजबूत होंगी। राहु की विषाक्‍तता पर सूर्य का आरोग्‍य प्राप्‍त होगा। 13 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में आ जाएंगे उसके बाद सरकारें मजबूत होगी। वहीं शत्रु का पूरा शमन करने में सरकार को सितंबर तक सफलता मिलेगी। 23 सितंबर को राहु और केतु अपनी राशि बदलेंगे।

आपको बता दें कि 26 सितंबर को कंकणाक्रती सूर्य ग्रहण पड़ा था सूर्य ग्रहण जब भी पड़ता है तो धरती पर कुछ न कुछ विपदा आती है। सूर्य ग्रहण का असर छह महीने तक रहता है और यह जून में समाप्‍त होगा। यदि बीच में संवत्‍सर बदल जाए तो उसका प्रभाव में न्‍यूनता आ जाती है। 25 मार्च नव संवत्‍सर प्रारंभ हो गया है इसलिए ग्रहण का प्रभाव में भी कमी आने लगेगी।

राहु का डिस्‍पोजिटर यानी राहु जिसके घर में है उसका मालिक‍ बुध 8अप्रैल को नीचे आएग। दूसरी ओर केतु के डिस्‍पोजिटर गुरू 30 मार्च को नीचे हो जाएंगे। इन सभी नकारात्‍मक स्थितियों को भंग करने का दम केवल सूर्य के पास है और 13 अप्रैल को जैसे ही सूर्य उच्‍च के होंगे वह असुरों को पराजित करेंगे। इसलिए 30 मार्च से 13 अप्रैल तक बहुत सचेत रहना होगा।