रोज पूजा के लिए समय न निकाल पाने वाले लोग रोज 5 मिनट करें ये काम, होगा कल्‍याण

do worship daily five minutes and get prosperty

शास्त्रों में मनुष्य को 84 लाख योनियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि यदि व्यक्ति अपने कर्मों को अच्छा रखे और नियमित रूप से भगवान की पूजा और मनन करे तो वो मनुष्य योनि के बाद मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकता है। यानी जन्म-मरण के इस बंधन से मुक्ति पा सकता है। लेकिन अक्सर मेट्रो सिटी में रहने वाले लोगों के पास समय की कमी होती है, जिस कारण वे चाहकर भी पूजापाठ के लिए बहुत ज्यादा समय नहीं निकाल पाते।

अगर आप किसी मेट्रो सिटी में रहते हैं या किसी अन्य वजह से आपका शेड्यूल

अक्सर बहुत व्यस्त रहता है और रोजाना पूजापाठ नहीं कर पाते तो चिंता की कोई बात नहीं। आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे आसान तरीके जिसके लिए आपको 24 घंटे में मुश्किल से पांच या 10 मिनट निकालने होंगे और आपकी पूजा संपन्न हो जाएगी।

इसके लिए रोजाना सुबह नित्य कर्म से निवृत्त होकर अपने घर के पूजा स्थान पर बैठिए। इसके बाद मन को शांत करके अपने आराध्य को नमन करें। इसके बाद नवग्रहों को प्रणाम करें, क्योंकि इन ग्रहों से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। सूर्य से हमें आत्मबल मिलता है। चंद्र मन में निश्छलता देते हैं। मंगल ग्रह काम करने की शक्ति और स्फूर्ति प्रदान करता है।

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बुध से अच्छी वाणी और अच्छा व्यवहार मिलता है। गुरु बृहस्पति हमारा रुझान आध्यात्मिकता की ओर करते हैं ताकि हम किसी भी काम को शुद्ध और आध्यात्मिक मन से कर सकें। शुक्र हमें भौतिक संसाधनों का सही उपयोग करने की क्षमता प्रदान करते हैं, शनि न्यायप्रिय बनाते हैं।  राहु सही युक्तिफल और केतु हानि लाभ से परे, कर्तव्य भावना से काम करना सिखाते हैं। इसलिए इन नवग्रहों को हमें रोजाना प्रणाम करना चाहिए।

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इसके बाद साक्षात शक्ति मां भगवती को प्रणाम कीजिए। पंचतत्व अग्नि, वायु, आकाश, जल, और भूमि को प्रणाम कीजिए। अपने पूर्वजों को याद कर प्रणाम करें, साथ ही माता पिता और गुरुजन को प्रणाम करें। नियमित रूप से इस प्रक्रिया को दोहराने में आपको बमुश्किल पांच से 10 मिनट लगेंगे और इसे करने से आपकी पूजा संपन्न हो जाएगी। जीवन में सुख शांति लाने और जीवन को उद्देश्य पूर्ण बनाने के लिए इतना समय तो चौबीस घंटों में हर कोई निकाल ही सकता है।

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इसके अलावा अपने कर्मों को बेहतर करें। किसी का बेवजह दिल न दुखाएं, गरीबों और जरूरतमंदों की यथासंभव मदद करें, बड़ों को सम्मान दें और बेजुबानों को न सताएं और अपने मन को शुद्ध रखें। याद रखिए आपके मन के भाव के आधार पर ही किसी भी काम की गति और परिणाम निर्भर करता है।

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