25 जनवरी से शुरू हो रही गुप्‍त नवरात्रि में बनेंगे 7 शुभ योग, होंंगे ये काम

gupt navratri 2020

25 जनवरी, 2020 से गुप्‍त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है, जो 3 फरवरी तक रहेगी। इन 10 दिनों की गुप्‍त नवरात्रि में सात शुभ योग बन रहे हैं, जिसमें खरीदारी, लेनदेन और विवाह जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इन शुभ मुहूर्त के साथ बसंत पंचमी पर्व भी होगा, जिसके कारण नवरात्रि और भी खास हो गई है।

शुभ मुहूर्तों में रवियोग, द्विपुष्‍कर योग, सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग शामिल हैं, जिनमें किए गए काम सिद्ध होते हैं। वहीं इन दिनों में चंद्रमा जब कुंभ और मेष राशि में रहेगा तब मंगल एवं वृह‍स्‍पति की दृष्टि चंद्रमा पर रहेगी, जिससे महालक्ष्‍मी और गजकेसरी योग का फल भी लोगों को मिलेगा।

शुभ योग   

25 जनवरी – सर्वार्थसिद्धि योग

26 जनवरी – द्विपुष्‍कर योग

28 जनवरी – रवियोग

29 जनवरी – रवियोग

30 जनवरी – सर्वार्थसिद्धि और रवियोग

31 जनवरी – सर्वार्थसिद्धि, अमृत सिद्धि और रवियोग

03 फरवरी – रवियोग

करें दुर्गासप्‍तशती का पाठ

गुप्‍त नवरात्रि में अधिकांश साधक देवी की अराधना कर अधिक से अधिक लाभ-पुण्‍य कमाने का प्रयास करते हैं। गुप्‍त नवरात्रि के दिन तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए सर्वश्रेष्‍ठ दिन माने गए हैं। कई साधक इन दिनों में दसों महाविद्याओं की साधना भी करते हैं। इनसे न केवल स्‍वयं के जीवन की परेशानियों का अंत होता है, बल्कि वे दूसरों की भलाई के काम भी कर सकते हैं।

गृहस्‍थ साधक जो सांसारिक वस्‍तुएं, भोग-विलास के साधन, सुख-समृ‍द्धि और निरोगी जीवन पाना चाहते हैं उन्‍हें इन नौ दिनों में दुर्गासप्‍तशती का पाठ करना चाहिए। गुप्‍त नवरात्रि में मानसिक पूजा की जाती है। माता की अराधना मनोकामनाओं को पूरा करती है।

9 दिनों में रखें सतर्कता

गुप्‍त नवरात्र में मानसिक पूजा का बहुत महत्‍व है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि गुप्‍त नवरात्र केवल तांत्रिक विद्या के लिए ही होते हैं। इनको कोई भी कर सकता है, लेकिन थोड़ी सतर्कता रखनी आवश्‍यक है। दस महाविद्या की पूजा आसान नहीं है। नौ दिनों के लिए कलश की स्‍थापना की जा सकती है। अगर कलश की स्‍थापना की है तो दोनों समय सुबह-शाम मंत्र जाप, चालीसा या सप्‍तशती का पाठ करना चाहिए। दोनों ही समय आरती भी करनी चाहिए। मां को दोनों समय भोग भी लगाएं। मां के लिए लाल फूल सर्वोत्‍म होते हैं पर ध्‍यान रखना चाहिए मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिल्‍कुल न चढ़ाएं।