Gupteshwar Mahadev Mandir: इस मंदिर में प्रकृति खुद करती है भगवान शिव का अभिषेक, अद्भुत है यहां की महिमा

मध्य प्रदेश में इंदौर शहर से करीब 15 किमी की दूरी पर एक प्राचीन शिव मंदिर हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां भगवान श्रीराम ने शिवलिंग स्‍थापित किया था। यह मंदिर “गुप्तेश्वर महादेव मंदिर” के नाम से प्रसिद्ध हैं। भगवान शिव के एक हजार साल से भी ज्यादा पुराने इस मंदिर में बारिश के मौसम में प्राकृतिक जल से भोलेनाथ का अभिषेक होता है।

वैसे तो महादेव के दर्शन के लिए साल भर ही यहाँ भक्तों का ताता लगा रहता है। लेकिन यह संख्या सावन-भादो के महीने में बढ़ जाती है। यह महीना शिवभक्तों के लिए किसी त्यौहार से कम नहीं होता ।

एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना 

इंदौर बायपास से एनएच 59 बैतूल मार्ग पर देवगुराड़िया पहाड़ी पर भगवान शिव का अद्भुत मंदिर है। यह एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। माना जाता है, देवगुराड़िया शिव मंदिर और शिवलिंग पूर्व समय में जमीन में दब गया था। बाद में ऊपर से एक मंदिर बनवा दिया गया था।

पहाड़ी जल से शिवजी का प्राकृतिक जलाभिषेक

हजारों साल पुराने इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां हर साल सावन में पहाड़ी जल से शिवजी का प्राकृतिक जलाभिषेक होता है। शिवलिंग के ऊपर की तरफ बने गौमुख के मुख से सावन-भादो के महीने में प्राकृतिक जल निकलता है, जो सीधे शिवलिंग पर गिरता है और मंदिर के दरवाजे के बाहर बने अमृतकुंड में भर जाता है। यह सिलसिला जब मंदिर बना था तब से चल रहा है।

नाग-नागिन भक्तों को दर्शन देते हैं

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर में भगवान शिव के गण माना जाने वाला नाग और नागिन का जोड़ा भी रहते  है। यह सिर्फ शिव के परम भक्तों को दिखाई देते हैं। कभी यह जोड़ा कुंड में तो कभी शिवालय में भक्तों को दर्शन देते हैं। मान्यता है, जिस भक्त को इनके दर्शन होते हैं, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

गरुड़ ने यहां कठिन तपस्या की थी

मान्यता है कि भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ ने यहां कठिन तपस्या की थी। जिसके बाद यहां शिव प्रकट हुए थे और शिवलिंग के रूप में यहीं रह गए। इसलिए इस स्थान का नाम देवगुराडिय़ा पड़ा है। इस स्थान को गरुड़ तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 18वीं सदी में शिव भक्त देवी अहिल्या ने करवाया था।