Pataleshwar Shiv Mandir : भोलेनाथ के इस मंदिर में बेलपत्र के साथ चढ़ाई जाती हैं झाड़ू, कारण जानकर हो जाएंगे हैरान

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए आपने शिवलिंग पर पंचामृत, दूध, जल, भांग, दही, घी, गंगा जल, बेलपत्र, धतूरा आदि चीज़ें अर्पित करने की बातें तो सुनी होगी। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भोले बाबा का एक मंदिर ऐसा भी है जहां झाड़ू चढ़ाई जाती है। सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन यह सच्‍चाई है। यह इस मंदिर की प्रथा है।

उत्तरप्रदेश में मुरादाबाद जिले के बहजोई के पास स्थित सदत्बदी गांव में भगवन भोले नाथ का एक प्राचीन मंदिर है जो “पातालेश्वर मंदिर” के नाम से प्रसिद्ध है। ये शिव मंदिर अपने आप में अनोखा है। इस मंदिर में लोग भगवान शिव को झाड़ू अर्पित करते हैं।इस गांव के लोग बताते हैं कि यहां झाड़ू चढ़ाने की परम्परा प्राचीन काल से चली आ ही है। यहां कांवड़िये हरिद्वार से गंगाजल लाकर शिवजी का अभिषेक करते हैं और झाड़ू भी चढ़ाते हैं।

क्यों चढ़ाई जाती हैं झाड़ू

ऐसी मान्यता है कि यहां शिवलिंग पर झाड़ू अर्पित करने से प्रत्येक इच्छाएं पू्र्ण होती हैं। झाड़ू के अर्पण से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ पड़ती है। त्वचा रोग का भी निवारण हो जाता है।यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि त्वचा की बीमारियों के अलावा अन्य बीमारियां भी दूर हो जाती हैं। यही कारण है कि यहां हर समय लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगती हैं।

करीब 150 साल पुराना है मंदिर

यहां के रहने वाले लोग बताते है कि ये मंदिर करीब 150 साल पुराना है। यहां भगवान शिव को झाड़ू अर्पित करने से त्वचा-संबंधी रोग दूर हो जाते हैं। इस मंदिर में शिवलिंग के अलावा भगवान शंकर की कोई मूर्ति भी नहीं है। इस मंदिर में लोग दूध, जल, फल-फूल, बेलपत्र, भांग, धतूरे के साथ-साथ सीकों वाली झाड़ू भी चढ़ाते हैं।

पातालेश्वर शिव मंदिर से जुड़ी मान्यता

मंदिर में झाड़ू अर्पित करने की प्रथा बहुत प्राचीन है। भोलेनाथ को झाड़ू अर्पित करने के लिए प्रतिदिन भक्त कई-कई घंटों तक कतारों में लगे रहते हैं। कहा जाता है कि इस गांव में भिखारीदास नाम का एक बहुत धनी व्यापारी रहता था। वह चर्म रोग से पीड़ित था। एक दिन जब वह इस रोग का इलाज करने हेतु जा रहा था कि तभी उसे बहुत प्यास लगी। वह अपनी प्यास बुझाने इस मंदिर में आया तो उस समय मंहत जी झाड़ू लगा रहे थे और वह उनसे टकरा गया। जिसके पश्चात बिना इलाज करवाए उसका रोग ठीक हो गया।

इससे वह सेठ बहुत प्रसन्न हुआ। और उसने महंत को बहुत धन देना चाहा परंतु उन्होंने लेने से इंकार कर दिया। मंहत जी ने इसके बदले यहां मंदिर निर्माण करने की बात कही। कुछ समय बाद भिखारीदास ने वहां पर शिव मंदिर का निर्माण करवा दिया। जो ‘पातालेश्वर मंदिर’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया। उस समय से ही यह कहा जाने लगा कि यहां झाड़ू अर्पित करने से त्वचा संबंधी रोगों से छुटकारा मिलता है।