इस कुंड में स्नान करने से चमक जाती है किस्मत, बनी रहती है सूर्ये देव की कृपा

हिन्दू धर्म में सूर्यदेव को पांच देवों का प्रमुख माना जाता है। रविवार के दिन सूर्यदेव की पूजा की जाती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करके ज्ञान, सुख, स्वास्थ्य, पद, सफलता और सिद्धि की प्राप्ति होती है। आज हम आपको राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित लोहार्गल में एक प्राचीन “सूर्य मंदिर” के बारे में बताने जा रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां स्थित सूर्य कूंड में स्नान करने से हर मनोकामना पूरी होती है और त्वचा संबंधी रोगों से भी मुक्ति मिलती है।

पांडवों ने किया था प्राश्चित  

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था लेकिन जीत के बाद भी पांडव अपने परिजनों की हत्या के पाप से चिंतित थे। लाखों लोगों की हत्या के पाप का दर्द देख श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि जिस तीर्थ स्थल के तालाब में तुम्हारे हथियार पानी में गल जाएंगे, वहीं तुम्हारा मनोरथ पूर्ण होगा। घूमते-घूमते पांडव लोहार्गल आ पहुंचे।  जैसे ही उन्होंने यहां के सूर्य कुण्ड में स्नान किया, उनके सारे हथियार गल गए। इसके बाद उन्होंने भगवान शिव की आराधना कर मोक्ष की प्राप्ति की।

भगवान विष्णु ने लिया था मत्स्य अवतार

यह क्षेत्र पहले ब्रह्मक्षेत्र था। ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक दैत्य का संहार करने के लिए मत्स्य अवतार लिया था। शंखासुर का वध कर भगवान विष्णु ने वेदों को उसके चंगुल से छुड़ाया था।

परशुराम ने यहां किया था प्रायश्चित

भगवान परशुराम ने क्रोध में आकर क्षत्रियों का संहार कर दिया था लेकिन शान्त होने पर उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। तब उन्होंने यहां आकर प्रायश्चित के लिए यज्ञ किया तथा पाप से मुक्ति पाई थी।

सूर्य कुंड व सूर्य मंदिर की कहानी

यहां प्राचीन काल से निर्मित सूर्य मंदिर लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके पीछे एक कथा बड़ी प्रचलित है। प्राचीन काल में काशी में सूर्यभान नामक के एक राजा थे। जिन्हें वृद्धावस्था में अपंग लड़की के रूप में एक संतान हुई। राजा ने भूत-भविष्य के ज्ञाताओं को बुलाकर उसके पिछले जन्म के बारे में पूछा। तब विद्वानों ने बताया कि पिछले जन्म में वह लड़की बंदरिया थी, जो शिकारी के हाथों से मारी गई थी। शिकारी उस मृत बंदरिया को एक बरगद के पेड़ पर लटका कर चला गया, क्योंकि बंदरिया का मांस अभक्ष्य होता है।

हवा और धूप के कारण वह सूख कर लोहार्गल धाम के जलकुंड में गिर गई पर उसका एक हाथ पेड़ पर ही रह गया। बाकी पूरा शरीर पवित्र जल में गिरने से वह कन्या के रूप में आपके यहाँ उत्पन्न हुई। विद्वानों ने राजा से कहा, आप वहां पर जाकर उस हाथ को भी पवित्र जल में डाल दें तो इस बच्ची का अंपगत्व ख़त्म हो जाएगा। राजा तुरंत लोहार्गल आए तथा उस बरगद की शाखा से बंदरिया के हाथ को जलकुंड में डाल दिया। जिससे उनकी पुत्री का हाथ अपनेआप ही ठीक हो गया।

राजा इस चमत्कार से अति प्रसन्न हुए। विद्वानों ने राजा को बताया कि यह क्षेत्र भगवान सूर्यदेव का स्थान है। उनकी सलाह पर ही राजा ने हजारों वर्ष पूर्व यहां पर सूर्य मंदिर व सूर्यकुंड का निर्माण करवा कर इस तीर्थ को भव्य रूप दिया।

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