बुधवार को इस प्रकार करें गणेश जी का पूजन, घर से हमेशा दूर रहेगा हर दुख-दर्द

गणेश पूजन

गणेश जी को बुद्धि का देव कहा जाता है। बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा-अराधना करने से वह अतिशीघ्र प्रसन्‍न होते हैं। गणेश जी को विघ्‍नहर्ता भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में प्रत्‍येक शुभ कार्य या पूजा से पहले गणेश जी का आह्वान अवश्‍य किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि गणेश पूजा के बिना कोई भी शुभ कार्य पूरा नहीं होता है। बुधवार को गणेश पूजन करने से घर के सभी दुख और बुध जनित दोष दूर होते हैं।

इस तरह करें गणेश पूजन:  

बुधवार को गणेश जी को सिंदूर जरूर चढ़ाएं। इस दिन गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने से आपके जीवन में आ रही सभी समस्‍याएं दूर हो जाती हैं। इस दिन किसी गरीब व्‍यक्ति को मूंग की दाल का दान करना चाहिए। यह बहुत ही शुभ माना गया है। इससे बुध दोष से मुक्ति मिलती है। गणेश को दूब चढ़ाने से भी वह खुश होते हैं। बुधवार को गाय को हरी घास खिलाने से भी गणेश जी प्रसन्‍न होते हैं।

गणेश जी को मोदक बहुत पसंद हैं। इसलिए इस दिन गणेश जी को मोदक का भोग जरूर लगाएं। सफेद पत्‍थर की गणेश जी की ऐसी प्रतिमा घर लाएं जिसका मुख दोनों तरफ हो। इस मूर्ति की पूजा करके इसे घर के मुख्‍य द्वारा पर लगा दें। मूर्ति को इस प्रकार लगाएं कि गणेश जी का मुख घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ हो। ऐसा करने से घर से सभी प्रकार की तांत्रिक नकारात्‍मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। बाहरी बुरी शक्तियां प्रभावहीन होने लगती हैं और घर में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।

पूजन विधि:

बुधवार का दिन या गणेश चतुर्थी का दिन गणेश पूजन के लिए उत्‍तम होता है। इन दिन सुबह-सुबह राहू काल के समय को छोड़कर पूरा आरंभ करें। यदि आप राहू काल के विषय में नहीं जानते हैं तो सुबह 7 बजे से पहले अपनी पूजा आरंभ कर सकते हैं। स्‍नान कर साफ व खुले कपड़े पहने व निम्‍न सामग्री को एकत्रित कर लें- धूप, दीप, रोली, फूल, दूब, मोदक व जल।

पूर्व दिशा में एक चौकी की स्‍थापना कर उस पर गणेश जी की प्रतिमा स्‍थापित करें। घी का दीपक जलाएं। धूप आदि लगाएं। ईशान कोण की तरफ जल के कलश को स्‍थापित करें। अब किसी अन्‍य पात्र के जल से दूब द्वारा जल को सभी दिशाओं में छिड़कते हुए इस मंत्र को बोलें:

ओम अपवित्रो पवित्रो वा सर्वावस्‍थां गतोअपिवा। य: स्‍मरेतपुण्‍डरीकाक्षं स बाह्याभ्‍यन्‍तर: शुचि:।

अब गणेश जी के स्‍तुति मंत्र द्वारा उनका आह्वान करें:

गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्‍थ जंबूफलसार भक्षितम्।

उमासुतं शोक विनाशकारणं, नमामि विघ्‍नेश्‍वर पादपंकजम्।

अब ईशान कोण में स्‍थापित वरुण देव का पूजन करें। अब आप दाएं हाथ में थोड़ा जल या चावल लेकर संकल्‍प लें: हे परमपित परमेश्‍वर मैं (अपना नाम बोलें) गोत्र (अपना गोत्र बोलें) स्‍थान (स्‍थान का नाम बोलें) दिन (दिन का नाम व तिथि बोलें) अपने कार्य (कार्य के विषय में बोलें) की पूर्णता हेतु गणेश जी की विशेष पूजा कर रहा हूं, इस कार्य में मुझे पूर्णता प्रदान करें। ऐसा कहते हुए हाथ के जल को नीचे जमीन पर छोड़ दें और बोलें: ओम श्री विष्‍णु, ओम श्री विष्‍णु, ओम श्री विष्‍णु।

अब आप बारी-बारी शुद्ध जल, दूध, घी, शहद, मिठाई और गंगाजल से गणेश जी की प्रतिमा को स्‍नान कराएं। यदि गणेश जी की फोटो है तो सुपारी के ऊपर लाल धागा लपेटकर गणेश जी की स्‍थापना करनी चाहिए और इसी को स्‍नान कराना चाहिए।

गणेश चालीसा या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ कर सकते हैं। आप नीचे दिए गए मंत्रों में से किसी एक का जाप अपने सामर्थ्‍य अनुसार कर सकते हैं:

ओम गं गणपतये नम: , ओम श्री विघ्‍नेश्‍वराय नम:, ओम श्री गणेशाय नम:।

मंत्र जाप के बाद गणेश आरती करें। गणेश जी से अपने घर में सुख-शांति और अपने कार्य की पूर्णता की प्रार्थना करें। अब आप गणेश जी सहित सभी देवों की जय-जयकार करें और अपने स्‍थान से खड़े हो सकते हैं।