महाशिवरात्रि 2020 : इस शिवरात्रि पर भोलेनाथ को शीघ्र करें प्रसन्‍न, चढ़ाएं ये पांच पत्ते

हिन्दू धर्म में महाशिवरात्रि का बहुत ख़ास महत्व होता है। यह पर्व फाल्‍गुन मास के कृष्‍णपक्ष की चतुर्दशी को देश भर के शिवालयों बड़ी धूमधाम से मनाया जाता हैं। 2020 में महाशिवरात्रि 21 फरवरी को मनाई जाएगी। भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था। देश भर में इस अवसर पर शिव बारात भी निकाली जाती है। इस दिन लोग  तरह-तरह से भोले नाथ की पूजा उन्‍हें प्रसन्न करने के लिए करते हैं। महाशिवरात्रि को महादेव की विशेष विधि विधान से पूजा की जाती है।

आज हम आपको बता रहे हैं उन 5 पत्‍तों के बारे में बता रहे हैं जिनको चढ़ाने से भोले नाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

बेलपत्र

भगवन शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय है। शिवपुराण में बेलपत्र की महिमा का वर्णन मिलता है। मान्‍यता है कि तीनों लोक में जितने पुण्‍य तीर्थ हैं वे सभी बेलपत्र के मूलभाग में निवास करते हैं। अगर भोले नाथ की पूजा में बेलपत्र न हो तो पूजा अधूरी मानी जाती है। जो लोग बेल पत्र से शिवजी की पूजा करते हैं, उन्‍हें भोले नाथ की विशेष अनुकंपा प्राप्‍त होती हैं। इतना ही नहीं बेलपत्र के साथ बेल के पेड़ की जड़ को समीप रखकर शिवजी को भोग लगाने से या शिव भक्तों को भोजन कराने से करोड़ों पुण्‍य की प्राप्ति होती है।

भांग के पत्‍ते

भगवान शिव को भांग अतिप्रिय है। इसके पत्‍ते शिवरात्रि के दिन भोलेबाबा को अर्पित करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्‍त होती है। दरअसल भांग को एक औषधि माना जाता है। मान्‍यता है कि जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का पान किया था तो उनके उपचार के लिए भांग के पत्‍त‍ों का प्रयोग किया गया था। इसी कारण शिवजी के पूजा में भांग के पत्‍तों का विशेष महत्‍व होता है।

आक के पत्ते

शिवपुराण में आक के पत्‍तों के बारे में बताया गया है। भोलेबाबा को इसके फूल और पत्‍ते दोनों खास प्रिय हैं। इसलिए शिव पूजा में आक के पत्‍ते और फूल दोनों चढ़ाए जाते हैं। ऐसा मान्‍यता है कि आक के पत्‍ते चढ़ाने से भोले बाबा आपकी अकाल मृत्‍यु से रक्षा करते हैं।

धतूरे का पत्ता

धतूरे का फल और पत्‍ता दोनों ही पूजा में प्रयोग किया जाता हैं। इसका प्रयोग भी मुख्‍य रूप से औषधि के रूप में होता है। शिव पुराण में बताया गया है कि शिवजी को धतूरा बेहद प्रिय है। धतूरा अर्पित करने वाले भक्‍तों का घर सदैव धन और धान्‍य से भरा रहता हैं।

दूर्वा

भगवान शिव और उनके पुत्र गणेशजी को दूर्वा खास प्रिय है। ऐसे मान्यता है कि इसमें अमृत बसा होता है। भगवान शिव को दूर्वा चढ़ाने से अकाल मृत्‍यु से रक्षा होती है।