पूजा करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, उल्‍टा हो सकता है परिणाम

पूजा का किसी भी धार्मिक व्यक्ति के जीवन में बहुत अधिक महत्व होता है। अपने परिवार में सुख और समृद्धि प्राप्त करने के लिए हम देवी-देवताओं की पूजा करते है, और यह परम्परा अनेकों वर्षों से हम निभाते आ रहे है। भगवान की पूजा से हमारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। परन्तु हम सभी को पूजा करने से पहले कुछ ख़ास नियमों का पालन करना चाहिए तभी हमें हमारी पूजा का शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो पायेगा।

हम आज आपको ऐसे कुछ नियम बताने जा रहे जो समान्य पूजन में भी आवश्यक है, तथा इन्हें अपनाकर आप पूजा से शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त कर सकते है

  • पूजा में दीपक को सही जगह रखना चाहिए। घी का दीपक हमेशा दाईं तरफ और तेल का दीपक बाईं ओर रखना चाहिए। जल पात्र, घंटा, धूपदानी जैसी चीजें हमेशा बाईं तरफ रखनी चाहिए।
  • तुलसी के पत्ते को बिना स्नान किये नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि शास्त्रों में बताया गया है की यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्ते तोड़ता है तो पूजा के समय तुलसी के ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किये जाते।
  • विशेष शुभ कार्यों में भगवान गणेश जी को चढ़ने वाली दूर्वा (एक प्रकार की घास) को कभी भी रविवार को नहीं तोड़ना चाहिए ।
  • यदि आप माँ लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करना चाहते हो तो उन्हें रोज कमल का पुष्प अर्पित करें। कमल के फूल को पांच दिनों तक लगातार जल चढ़कर पुनः अर्पित कर सकते है।
  • शिव जी, माँ दुर्गा, भगवान विष्णु, गणेश जी और भगवान सूर्यदेव ये पंचदेव कहलाते है और इनकी पूजा हर कार्यों में निश्चित रूप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजा करते समय इन पांच देवों का ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और समृद्धि आती है।
  • माँ दुर्गा को दुर्वा (एक प्रकार की घास) कभी नहीं अर्पित करनी चाहिए क्योंकि यह भगवान गणेश को विशेष प्रकार से चढ़ाई जाती है।
  • कभी भी दीपक से दीपक को ना जलाए क्योंकि शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने वाला व्यक्ति रोग से ग्रसित हो जाता है।
  • रविवार और बुधवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए।
  • रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।
  • भगवान की आरती करते समय कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए। भगवान के चरणों की आरती चार बार करनी चाहिए इसके बाद क्रमश: उनके नाभि की आरती दो बार तथा उनके मुख की आरती एक या तीन बार करनी चाहिए। इस प्रकार भगवान के समस्त अंगों की सात बार आरती करनी चाहिए।
  • पूजाघर में मूर्तियाँ 1, 3, 5, 7, 9 और 11 इंच तक की होनी चाहिए, इससे बड़ी नहीं तथा खड़े हुए गणेश जी, सरस्वतीजी और लक्ष्मीजी की मूर्तियाँ घर में नहीं होनी चाहिए ।
  • हमेशा भगवान की परिक्रमा इस अनुसार करें : विष्णु जी की चार, गणेश जी की तीन, सूर्य देव की सात, माँ दुर्गा की एक एवं शिव जी की आधी परिक्रमा।