रंगपंचमी पर इस तरह से रंग लगाने का है महत्‍व, जानें क्‍या है सही तरीका

rang panchami

होली के बाद अब लोगों को इंतजार है रंगपंचमी का। होली के पांचवें दिन यानी चैत्र कृष्‍ण पंचमी को रंगपंचमी का त्‍योहार मनाया जाता है। इस वर्ष 2 अप्रैल को यह पर्व मनाया जाएगा। यह त्‍योहार देवी-देवताओं को समर्पित होता है इसलिए रंगपंचमी में रंग को शरीर पर लगाकर नहीं बल्कि हवा में उड़ाकर मनाया जाता है। इस दिन राधा-कृष्‍ण की भी पूजा की जाती है। मथुरा और वृंदावन में इसे काफी धूमधाम से मनाया जाता है। बरसाने में इस दिन उनके मंदिर में विशेष पूजा और दर्शन लाभ होते हैं।

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रंग पंचमी होली की ही तरह मस्‍ती और उत्‍साह से खेली जाती है। हिंदू लोगों के लिए यह दिन एक महत्‍वपूर्ण धार्मिक महत्‍व है। रंगों के माध्‍यम से देवताओं को आमंत्रित किया जाता है। इस दिन पर लोग अपने परिवार, रिश्‍तेदारों और दोस्‍तों के साथ रंग खेलते हैं। इस दिन विशेषतौर पर राधा और कृष्‍ण की पूजा की जाती है। इस पर्व पर रंगों से ज्‍यादा गुलाल का प्रयोग किया जाता है।

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बरसाने के साथ ही महाराष्‍ट्र में इस त्‍यौहार को धूमधाम से मनाया जाता है। मछुआरों के लिए इस दिन का विशेष महत्‍व है। राजस्‍थान में इस अवसर पर विशेष रूप से जैसलमेर के मंदिर महल में लोकनृत्‍यों में डूबा वातावरण देखते ही बनता है जबकि हवा में लाल नारंगी और फिरोजी रंग उड़ाए जाते हैं। इसके अलावा इंदौर में इस दिन सड़कों पर रंग मिश्रित सुगंधित पानी छिड़का जाता है। मालवा में इस दिन गेर होता है जिसमें जलूस निकाला जाता है।