शनिदेव को प्रसन्न करने के कुछ खास उपाय

हिन्दू धर्म के अनुसार शनि देव को न्याय का देवता भी माना जाता हैं। क्यूंकि वह मनुष्य के कर्मो के अनुसार उन्हें फल देते हैं। आप सभी ने सुना होगा कि शनिदेव अगर किसी पर नाराज हो जाएं तो, उस मनुष्य को कई प्रकार की परेशानियां का सामना करना पड़ता हैं। इसलिये लोग शनिदेव से काफी डरते हैं और उन्‍हें खुश करने के तरह – तरह के उपाय करते हैं। वहीं अगर शनिदेव किसी मनुष्य पर दिल से प्रसन्न हो जायें, तो उस मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि आप कैसे शनि देव को प्रसन्न कर सकते हैं।

शनिदेव को प्रसन्न करने के कुछ खास उपाय

  1. शनि देव को सरसों का तेल बहुत पसंद है। शनि भगवान को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और उस पर सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए। माना जाता है कि सूर्योदय से पहले पीपल की पूजा करने पर शनि देव अत्यधिक प्रसन्न होते हैं।
  2. शनिवार के दिन आप काले रंग की गाय की पूजा करके भी शनिदेव को प्रसन्न कर सकते हैं। इसके लिए आपके गाय के माथे पर तिलक लगाने के बाद सींग में पवित्र धागा बांधिए और फिर धूप दिखाएं। उसके बाद गाय की आरती जरूर करनी चाहिए। अंत में गाय की परिक्रमा करने के बाद उसको चार बूंदी के लड्डू भी खिलाएं। यह शनिदेव की साढ़ेसाती के सभी हानिकारक प्रभावों को रोकता है।
  3. शनिवार के दिन काली चीजें जैसे काले तिल, काला कपड़ा, कंबल, लोहे के बर्तन, उदड़ की दाल का दान जरुरतमंदों को करें। इससे शनि देव बहुत जल्दी प्रसन होते हैं ।
  4. शनि के ढैय्या के हानिकारक प्रभाव को रोकने के लिए शुक्रवार की रात में 8 सौ ग्राम काले तिल पानी में भिगो दें और शनिवार को प्रातः उन्हें पीसकर उसमे गुड़ मिलाकर 8 लड्डू बनाएं और किसी काले घोड़े को खिला दें। आठ शनिवार तक यह प्रयोग करें।
  5. शुक्रवार कि रात में सवा-सवा किलो काले चने अलग-अलग तीन बर्तनों में भिगो दें। इसके बाद शनिवार को सुबह नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर शनिदेव का पूजन करें और चनों को सरसो के तेल में छौंक कर इनका भोग शनिदेव को लगायें। इसके बाद पहला सवा किलो चना भैंसे को खिला दें। दूसरा सवा किलो चना कुष्‍ठ रोगियों में बांट दें और तीसरा सवा किलो चना अपने ऊपर से उतार कर किसी सुनसान स्थान पर रख आयें।
  6. शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के चारों ओर सात बार कच्चा सूत लपेटें इस दौरान शनि मंत्र का जाप करते रहिये, यह आपकी साढ़ेसाती की सभी परेशानियों को दूर ले जाता है। धागा लपेटने के बाद पीपल के पेड़ की पूजा करे और कड़वे तेल का दीपक अवश्य जलाए। साढ़ेसाती के प्रकोप से बचने के लिए इस दिन उपवास भी रख सकते हैं और बिना नमक के भोजन करिये।