छींक और छींकने के तरीके से जुड़े शकुन-अपशकुन के बारे में जानिए सबकुछ

Sneeze favorable or not know here

मानव या जानवर द्वारा छींकने की प्रक्रिया को अक्‍सर अशुभ या अपशकुन की निशानी माना जाता है। रोगी मनुष्‍य द्वारा बार-बार छींकने को अपशकुन नहीं माना जाता है। भारत में छींक से जुड़ी कई किवदंतियां प्रचलित हैं। आज हम इस लेख में छींक और छींकने की तरीके से जुड़े शकुन और अपशकुन किवदंतियों के बारे में जानेंगे। लोक मानस का विश्वास है कि एक से अधिक छींक आने पर अपशकुन नहीं होता। यहां उल्‍लेखनीय है कि यह जानकारी परंपरागत रूप से प्राप्‍त ज्ञान पर आधारित है, इसलिए पाठकों की सहमति-असहमति उनके स्‍व-विवेक पर निर्भर है।

  • रसोई में दूध उबलते समय
    यदि गृहिणी छींक दे तो इसे आपत्तिजनक माना गया है।
  • मार्ग में यदि गजराज छींक दे तो राज्य लाभ होता है।
  • रास्ते में अथवा घर के बाहर यदि कुत्ता छींक दे तो विघ्न और विपत्ति की सूचना है, यदि कुत्ता एक से अधिक बार छींक दे तो विपत्ति के टल जाने की संभावना है।
  • दु:स्थान, श्मशान तथा किसी दुर्घटना स्थल पर कोई व्यक्ति छींक मार देता है तो इसे वैदिक साहित्य में शुभ माना जाता है।
  • भूकंप, दुर्भिक्ष या महामारी की सूचना पर यदि जीव-जंतु तथा मनुष्य छींक दे तो अनिष्ट के दूर होने की संभावना रहती है।
  • शुभ कार्य के लिए जाते समय यदि गाय या उसका बछड़ा छींक दे तो निश्चित कार्य सिद्धि होती है। यह शकुन धन वृद्धि का भी सूचक है।
  • दवाई का सेवन करते समय यदि छींक आए और औषधि गिर जाए तो रोग का निवारण शीघ्र होता है।
  • ऊंची छींक बड़ी ही उत्तम होती है।
  • नीची छींक बड़ी दुखदायी होती है।
  • चलते समय अपनी छींक बड़ा दुख देने वाली होती है।
  • दाईं तरफ की छींक धन को नष्ट करती है।
  • बाईं तरफ की छींक से सुख मिलता है।
  • सामने की छींक लड़ाई-झगड़े का संकेत है।
  • पीछे की छींक से सुख मिलता है।
  • शुभ कार्य के लिए गमन के समय यदि कोई छींक मार दे तो अपशकुन होता है।