Dev Diwali पर जरूर करें ये काम, बनी रहेगी सुख-समृद्धि

पौराणिक कथा के अनुसार देव दिवाली के दिन स्‍वर्गलोक से उतरकर देव काशी में दिवाली मनाते हैं। कार्तिक माह की अमावस्‍या के दिन प्रभु श्रीराम 14 साल का वनवास खत्‍मकर अयोध्‍या वापस लौटे थे। कार्तिक माह की पूर्णिका को भी एक दीवाली मनाई जाती है, जिसे देव दिवाली (Dev Diwali) कहा जाता है।

एक बार पृथ्वी पर त्रिपुरासुर राक्षस का आतंक फैल गया। देव गणों ने भगवान शिव से इस राक्षस के संहार की विनती की, जिसे स्वीकार करते हुए शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध कर दिया। इससे देवता अत्यंत प्रसन्न हुए और शिव का आभार व्यक्त करने के लिए

काशी आए।  जिस दिन इस अत्याचारी राक्षस का वध हुआ और देवता काशी में उतरे उस दिन कार्तिक मास की पूर्णिमा थी। देवताओं ने काशी में अनेकों दीए जलाकर दिवाली मनाई। यही कारण है कि हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा पर आज भी काशी में दिवाली मनाई जाती है।

मुहूर्त

इस बार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 29 नवंबर को दोपहर 12.47 बजे से शुरु होकर 30 नवंबर तक दोपहर 2.59 बजे तक रहेगी। चूंकि दिवाली रात का पर्व है इसीलिए 29 नवंबर की रात काशी में दीए जलाकर देव दिवाली मनाई जाएगी।

सोमवार को होगा पवित्र नदियों में स्नान

कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों व तालाब में स्नान का विशेष महत्व है। इस बार दिवाली दो दिन है इसीलिए देव दिवाली 29 नवंबर को होगी, जबकि 30 नवंबर को सुबह लोग पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाएंगे। ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। वही स्नान के बाद दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जरूरतमंदों को दान अवश्य करें।