Vishwakarma Jayanti 2020: पूजा तिथि, मुहुर्त, समय और पूजन विधि

Vishwakarma Jayanti

विश्‍वकर्मा जयंती एक शुभ दिन है, जो पूरी तरह से भगवान विश्‍वकर्मा को समर्पित है। इन्‍हें देवताओं का प्रमुख वास्‍तुकार माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विश्‍वकर्मा ने सभी हिन्‍दू देवी-देवताओं के निवास स्‍थान और उनके हथियारों एवं वाहन का निर्माण किया है।

ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार विश्‍वकर्मा जयंती 16 या 17 सितंबर को कन्‍या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। विश्‍वकर्मा जयंती 2020 7 फरवरी को भी मनाई जा रही है। हर साल भगवाल विश्‍वकर्मा के जन्‍मदिवस के दिन विश्‍वकर्मा पूजा का आयोजन किया जाता है। राजस्‍थान और गुजरात के कुछ स्‍थानों पर, विश्‍वकर्मा जयंती को फरवरी में मनाया जाता है।

विश्‍वकर्मा जयंती 2020 का आयोजन है इसलिए हम आपके लिए महत्‍वपूर्ण पूजन समय और त्रयोदशी तिथि को बता रहे हैं।

विश्‍वकर्मा जयंती 2020 तिथि और मुहुर्त:

सूर्योदय: 7 फरवरी, 2020, सुबह 7:08

सूर्यास्‍त: 7 फरवरी, 2020, शाम 6:13

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 फरवरी, 2020, सुबह 8:23 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्‍त: 6 फरवरी, 2020, शाम 6:31 बजे

विश्‍वकर्मा जयंती पर दुकानों, फैक्‍टरियों, कार्यालयों और कार्यस्‍थलों पर पूजा का आयोजन किया जाता है। लोग अपने स्‍थानों पर फूलों की सजावट करते हैं और त्‍योहार मनाते हैं। लोग भगवात विश्‍वकर्मा की पूजा करते हैं और उनके वाहन हाथी को भी पूजते हैं।

भगवान विश्‍वकर्मा की प्रतिमा को पंडालों में सजाया जाता है और वहां पूजा-अर्चना की जाती है। लोग घरों में व्‍यंजन बनाते हैं और परिवार एवं दोस्‍तों के साथ मिलकर जश्‍न मनाते हैं। श्रमिक इस दिन अपने औजारों और उपकरणों की पूजा करते हैं। यह वास्‍तव में उनके काम का शगुन है। इस दिन विशेष मिठाई बनाई जाती है और इसे पड़ोसी एवं दोस्‍तों के बीच बांटा जाता है।

जन्‍म की कथा

ब्रह्मा के पुत्र थे धर्म। धर्म के पुत्र थे वास्‍तुदेव। वास्‍तुदेव और अंगिरसी को जो पुत्र हुआ उसका नाम था विश्‍वकर्मा। स्‍कंद पुराण की कथा के अनुसार धर्म ऋषि के आठवें पुत्र प्रभास का विवाह देव गुरु बृहस्‍पति की बहन भुवना ब्रह्मवादिनी के साथ हुआ। भगवान विश्‍वकर्मा इन्‍हीं भुवना ब्रह्मवादिनी के पुत्र हैं। वराह पुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने विश्‍वकर्मा को धरती पर उत्‍पन्‍न किया। विश्‍वकर्मा ने धरती पर महल, हवेली, वाहन, शस्‍त्र आदि का निर्माण किया।

पूजन विधि

अपने काम में उपयोग होने वाली मशीनों, औजारों और उपकरणों को साफ कर लें। पूजास्‍थल पर भगवान विष्‍णु के साथ भगवान विश्‍वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्‍थापित करें। दोनों देवताओं को कुमकुम, अक्षत, अबीर, गुलाल, मेंहदी, हल्‍दी, वस्‍त्र, फूल आदि चढ़ाएं। आटे से चौक पूरकर उसके ऊपर सात प्रकार के अनाज रखें। इसके ऊपर जल का कलश भी स्‍थापित करें। एक बर्तन में चावल रखकर उसे स्‍थापित करें। भगवान विष्‍णु व विश्‍वकर्मा को ऋतुफल, मिष्ठान, पंचमेवा, पंचामृत का भोग लगाएं। दीप-धूप आदि जलाकर दोनों देवताओं की आरती उतारें।